Saturday, 21 July 2012

नेहरु परिवार के आदरणीय लोगो का चरित्र चित्रण !


अब ज़रा इस परिवार के बहुत ही ज्यादा आदरनीय लोगो के चरित्र पर प्रकाश डालता हूँ !
भारतीय सिविल सेवा के एम ओ मथाई जिन्होंने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निजी सचिव के रूप में भी कार्य किया. मथाई जी ने एक पुस्तक “Reminiscences of the Nehru Age”(ISBN-13: 9780706906219) 'लिखी !
किताब से पता चलता है कि वहाँ जवाहर लाल नेहरू और माउंटबेटन एडविना (भारत, लुईस माउंटबेटन को अंतिम वायसराय की पत्नी) के बीच गहन प्रेम प्रसंग था..

ये प्रेम सम्बंद इंदिरा गांधी के लिए महान शर्मिंदगी का एक स्रोत था! इंदिरा गाँधी अपने पिता जवाहर लाल नेहरु को इस सम्बंद के बारे में समझाने हेतु मोलाना अबुल कलाम आज़ाद कि मदद लिया करती थी!
यही नहीं, जवाहर लाल का सरोजिनी नायडू की पुत्री पद्मजा नायडू के साथ भी प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिसे बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया था!
इस बात का खुलासा भी हुआ है कि जवाहर लाल नेहरु अपने कमरे में पद्मजा नायडू की तस्वीर रखते थे जिसे इंदिरा गाँधी हटा दिया करती थी!

इन घटनाओं के कारण पिता-पुत्री के रिश्ते तनाव से भरे रहते थे!
आगे पढ़िए!
उपरोक्त सम्बन्धों के अतिरिक्त भी जवाहर लाल नेहरु के जीवन में बहुत सी अन्य महिलाओं से नाजायज़ ताल्लुकात रहे हैं!
नेहरु का बनारस की एक सन्यासिन शारदा(श्रद्धा) माता के साथ भी लम्बे समय तक प्रेम प्रसंग चला !
यह सन्यासिन काफी आकर्षक थी और प्राचीन भारतीय शास्त्रों और पुराणों में निपुण विद्वान थी!
जब उस सन्यासिन ने अपने इस रिश्ते को अवैध से वैध बनाना चाहा और नेहरु के सामने शादी का प्रश्न उठाया, तब नेहरु ने साफ़ जवाब दे दिया क्यूंकि इससे नेहरु के राजनीतिक जीवन पर असर पड़ सकता था ! उनके सम्बन्धों से एक बेटा पैदा हुआ था और वह एक ईसाई मिशनरी बोर्डिंग स्कूल में रखा गया था. उनके जन्म तिथि के लिए 30 मई 1949 होने का अनुमान है. वह अपने शुरुआती साठ के दशक में अब हो सकता है!
ऐसे मामलों में convents बच्चे के अपमान को रोकने के लिए गोपनीयता बनाए रखते हैं! हालांकि मथाई बच्चे के अस्तित्व की पुष्टि की,लेकिन कभी कोई प्रयास नहीं किया गया उसे खोज निकालने का! निश्चय ही वह बच्चा एक ईसाई के रूप में बड़ा हुआ होगा जिसे यह नहीं मालूम होगा कि उसका वास्तविक पिता कौन था !
अब इस परिवार कि चालाकियों और षड़यंत्र के बारे में संदेह पैदा करने वाली कुछ घटनाओं को याद करते हैं !
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत के प्रधानमंत्री के पद के लिए जवाहरलाल नेहरू के प्रतियोगियों में थे और उन दोनों को रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई।
इन सभी तथ्यों को जानने के बाद, वहाँ बाल दिवस के रूप में नेहरू के जन्मदिन को मनाना कहाँ तक उचित है!?
खैर अभी तो पूरा परिवार इन गुणों से भरा पड़ा है!

एस. सी. भट्ट की एक पुस्तक “The great divide: Muslim separatism and partition” (ISBN-13:9788121205917) के अनुसार --जवाहरलाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी अपने पिता के कर्मचारी सयुद हुसैन के साथ भाग गई. तो मोतीलाल नेहरू जबरदस्ती उसे वापस ले आया और एक रंजीत पंडित नाम के एक आदमी के साथ उसकी शादी कर ली.
इंदिरा प्रियदर्शिनी को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था लेकिन वहां से बेकार प्रदर्शन के लिए बाहर निकाल दिया गया!.

बाद में उसे शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन, रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उसे वहां से खराब आचरण के लिए बहर निकाल दिया !
शांति निकेतन से निकाले जाने के बाद इंदिरा अकेलेपन से ग्रस्त हो गई ! उसकी माँ की तपेदिक से मृत्यु हो चुकी थी और बाप राजनीति में व्यस्त था! इस अकेलेपन में उसे साथ मिला फ़िरोज़ खान नाम के एक युवक का जो उन दिनों मोतीलाल नेहरु की हवेली में शराब आदि की सप्लाई करने वाले एक पंसारी नवाब खान का बेटा था! फिर महाराष्ट्र के राज्यपाल डा. श्रीप्रकाश ने नेहरू को इस बारे में चेतावनी भी दी थी कि इंदिरा का फिरोज खान के साथ एक अवैध संबंध चल रहा था! फ़िरोज़ खान इंग्लैंड में पढ़ा हुआ एक युवक था जो इंदिरा से बहुत सहानुभूति रखता था! जल्दी ही इंदिरा ने अपना धर्म फिर से बदल लिया और मुस्लिम धर्म अपना कर फिरोज से लंदन की एक मस्जिद में शादी कर ली ! अब इंदिरा प्रियदर्शनी नेहरु का नाम बदल कर मैमुना बेगम हो चुका था! कमला नेहरु इस बात से जल भुन गई ! उधर जवाहर लाल नेहरु भी परेशान था क्यूंकि इससे फिर उसके राजनितिक जीवन पर असर पड़ना था!
तो अब जवाहर लाल ने फ़िरोज़ खान को उसका उपनाम बदल कर गाँधी रखने को कहा! और उसे विश्वास दिलवाया कि सिर्फ उपनाम खान की जगह गाँधी इस्तेमाल करो और धर्म बदलने की भी कोई जरुरत नहीं है! यह सिर्फ एक एफिडेविट से नाम बदलने जैसा था! तो फ़िरोज़ खान अब फ़िरोज़ गाँधी बन गया लेकिन यह नाम उतना ही अजीब लगता है जितना कि अगर किसी का नाम बिस्मिल्लाह शर्मा रख दिया जाये !

दोनों ने अपना उपनाम बदल लिया और जब दोनों भारत आये तो भारत की जनता को बेवकूफ बनाने के लिए हिन्दू विधि विधान से शादी कर दी गई!

तो अब इंदिरा गाँधी कि आने वाली नसल को एक नया फेंसी नाम गाँधी मिल गया था!
नेहरु और गाँधी ये दोनों नाम ही इस परिवार के खुद के बनाये हुए उपनाम हैं!
जैसे एक गिरगिट अपना रंग बदलता है उसी तरह इस वंश ने अपनी गतिविधयों को छुपाने के लिए अपने नाम बदलें हैं!

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